कलेक्टर रायगढ़ की कार्यशैली से आम जन, जन प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी परेशान जिले भर में विकास कार्यों की गति रुकी,अधिकारियों की पदस्थापना के महीनों बाद भी कार्य विभाजन नहीं

Published by Awadh Bareth on

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कलेक्टर रायगढ़ की कार्यशैली से आम जन, जन प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी परेशान जिले भर में विकास कार्यों की गति रुकी,अधिकारियों की पदस्थापना के महीनों बाद भी कार्य विभाजन नहीं

जिले भर में विकास कार्यों की गति रुकी,अधिकारियों की पदस्थापना के महीनों बाद भी कार्य विभाजन नहीं

रायगढ़..यह बात किसी से छुपी नहीं है कि जिले भर के विकास कार्यों की चाभी कलेक्टर के हाथों में होती है। कलेक्टर चाहे तो पैसों के अभाव में भी जिले के किसी भी क्षेत्र में जारी विकास कार्य कभी नही रुकेंगे।

वहीं अगर जिले का कलेक्टर अगर निष्क्रिय हो जाए तो राज्य सरकार संबंधित जिले के विकास के लिए पैसों का अंबार भी लगा दे तो भी जिला पिछड़ा ही रह जाता है।

ऐसा ही कुछ नजारा रायगढ़ जिले में देखने को मिल रहा है। कुछ एक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने नाम न लिखे जाने की शर्तों में बताया कि वर्तमान कलेक्टर रानू साहु ने पदस्थापना के बाद से अपना व्यवहार कुछ इस तरीके का बना लिया है जिससे लोगों को राहत मिलने की जगह उनकी परेशानियां ही बढ़ी हैं।

इनकी माने तो जिला कलेक्टर रानू साहु अक्सर छुट्टियों में बाहर रहती हैं। जिसकी वजह से जारी विकास कार्य लगभग थमने लगे है। तत्कालीन कलेक्टर भीम सिंह के कार्यकाल में शुरू हुए कार्यों की बकाया राशि का भुगतान रुकने की वजह से नए काम शुरू नही हो पा रहे है।

जिला मुख्यालय के निकटम ग्राम पंचायतों के स्थानीय जन प्रतिनिधियों की मानें तो कलेक्टर मैडम के ज्यादातर अवकाश में रहने के कारण नए पदस्थापित डिप्टी कलेक्टरों का लम्बे समय तक कार्य_विभाजन नही हुआ है। कार्य विभाजन नही होने पाने के कारण दोनो डिप्टी कलेक्टर भी जिम्मेदारियों से मुक्त रहकर अक्सर अवकाश में रहते हैं।

पहले ही कलेक्ट्रेट में स्थापित विभिन्न विभागों में पेडिंग फाइलों का भंडार लगा हुआ है। ऊपर से नए कार्यों का बोझ अलग बढ़ने लगा है। चुकी विकास कार्यों में खर्च की गई राशि के भुगतान प्राप्ति के लिए डिप्टी कलेक्टरों का अनुमोदन फाइल में जरूरी होता है। अब विभाजन नही हों पाने के कारण डिप्टी कलेक्टर काम नही कर पा रहे हैं। ऐसे में पुराने कार्यों का भुगतान पूरी तरह से रुक हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विगत टी एल बैठक में कुछेक अधिकारियों ने कलेक्टर मैडम के समक्ष इस मुद्दे को उठाया भी कि कार्यविभाजन और आपके उचित निर्देशन के अभाव वित्त विभाग के दर्जनों फाइल भुगतान के लिए अटकी पड़ी हैं। विभागीय लोगों की मानें तो पूर्व कलेक्टर आवश्यक फाइलों को ड्यूटी के बाद निवास स्थान पर मंगवा कर उसका अवलोकन और साइन करने थे। पंरतु कलेक्टर मैडम ने अब तक इस परंपरा को रोके रखा हैं।

इधर जिला पंचायत के वर्तमान सी ई ओ श्री मिश्रा का कहना है कि अब जिले में दो डिप्टी कलेक्टर है उनके रहते मैं भला फाइल साइन क्यों करूंगा? जब नही थे तब कर देता था। वही डिप्टी कलेक्टरो के पास कार्य_विभाजन नही होने का रेडिमेट बहाना है। इस वजह से पुराने कार्य भुगतान के अभाव में या तो आधे अधूरे स्थिति में लटके पड़े है या काम पूरा होने के बाद भुगतान की राशि ही अटक गई है।

इसके बावजूद नए कार्यों की पूरी लिस्ट रखी हुई है। ऐसे में अगर कलेक्टर मैडम ने गंभीरता नही दिखाई तो जिले में जारी विकास कार्य सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद पूरी रुक जाएगा।


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